Tuesday, July 28, 2020

कुमकुम : भोजपुरी फिल्मों की पहली महिला निर्मात्री

                                जन्म: 22 अप्रैल 1934                             मृत्यु : 28 जुलाई 2020

अभिनेत्री कुमकुम का 86 वर्ष की उम्र में यहां निधन हो गया। उन्होंने आरपार, सीआईडी, कोहिनूर, मदर इंडिया, नया दौर, श्रीमान फंटूश, गंगा की लहरें, राजा और रंक, आंखें जैसी हिट फिल्मों में काम किया। उन पर फिल्माए गीत कभी आर, कभी पार, मधुबन में राधिका नाचे रे, काफी लोकप्रिय रहे। 

(अभिनेत्री कुमकुम हिन्दी फिल्मों के अलावा भोजपुरी की एक लोकप्रिय अभिनेत्री थीं जिन्हें लोगों ने कई फिल्मों में अभिनय करते देखा। इनसे संबंधित एक लेख जो एक पुस्तक में मिली है उसे आप लोगों से शेयर कर रहा हूं। चूंकि पुस्तक के कॉपीराइट के तहत मैंने इसे पूरी तरह उसे ही लिया है। नीचे पुस्तक के बारे में पूरी जानकारी दी जा रही है। पाठक इसे उस पुस्तक से अवश्य पढ़ लें।)

सन 1965 में निर्मित हुई गंगा और भौजी ने भोजपुरी सिनेमा को पहली महिला निर्मात्री दी। वह निर्मात्री कोई और नहीं बल्कि पहली भोजपुरी फिल्म की मुख्य नायिका कुमकुम थीं। विदित हो कि गंगा मइया.... में अभिनय करने के पूर्व कुमकुम को भोजपुरी नहीं आती थी। उतनी ही नहीं, वे भोजपुरी में काम करना भी नहीं चाहती थीं, उन्हें राजी करने में नजीर साहब के परम मित्र व हास्य अभिनेता महमूद का बड़ा योगदान रहा था। उन्होंने जब हामी भरी तो उनके भोजपुरी गुरु नजीर हुसैन बने। एक रोचक तथ्य यह भी है कि जब नजीर साहब कुमकुम के पास गंगा मइया...भोजपुरी में अभिनय करने का प्रस्ताव लेकर गए थे, तब कुमकुम तकदीर, मदर इंडिया, सन ऑफ इंडिया जैसी फिल्मों के फिल्मकार महबूब खान के साथ अनुबंधित थीं। सो उनके लिए गंगा मइया में अभिनय करने के बीच एक कानूनी बाधा भी थी। परंतु नजीर हुसैन ने महबूब खान को मना लिया और उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, इस आशय एक लिखित पत्र निर्गत करवाया। बाद में कुमकुम ने न केवल गंगा मईया, लागी नहीं छूटे रामा, गंगा, भौजी सरीखी भोजपुरी फिल्मों में अभिनय किया, बल्कि भोजपुरी में उन्होंने भी गंगा नाम से ही फिल्म निर्माण की शुरुआत की। 

कुमकुम मूलत: बिहार के तत्कालीन मुंगेर जिला अंतर्गत मगही क्षेत्र हुसैनाबाद, बरबीघा (अब जिला शेखपुरा) की रहने वाली थीं। उनका वास्तविक नाम जईबुन निसा था। पिता मंजूर हसन खान हुसैनाबाद रियासत के नवाब थे। माता खुर्शीद बानो कला-प्रेमी एवं गृहणी थीं। उनकी पढ़ाई लिखाई घरेलू, पर पंडित शंभू महाराज लखनऊ घराना से उन्होंने शास्त्रीय नृत्य कत्थक की विधिवत शिक्षा हासिल की। कुमकुम पहली बार रुपहले पर्दे पर गुरुदत्त की आर-पार 1954 के एक मशहूर गीत कभी आर कभी पार लागा तीरे नजर में अवतरित हुई थीं। उसके बाद आंसू 1953, मिर्जा गालिब 1954, नूर महल 1960 हातिमताई की बेटी 1955 हसीना 1955, मेम साहिब 1956, मदर इंडिया 1957, प्यासा 1957, घर संसार 1958, मधु 1959, कोहिनूर 1960, शान ए हिंद 1960, सन ऑफ इंडिया 1962, आंखें 1968, सहित लगभग 120 हिंदी फिल्मों में अभिनय के माध्यम से लगभग 20 वर्षों तक लगातार सिने जगत में सक्रिय रहीं। उनकी अंतिम फिल्म रामानंद सागर की जलते बदन 1974 थी। सन 1975 में लखनऊ निवासी सज्जाद खान से शादी करने के बाद पूरी तरह से फिल्मों से दूरी बना लीं। 

                            
                        टाइटल             : भोजपुरी फिल्मों का सफरनामा
                        लेखक               : रविराज पटेल
                        प्रकाशक           : प्रभात प्रकाशन
                        आईएसबीएन    : 9351862038, 9789351862031
                         कुल पृष्ठ            : 192
                         विषय                : आर्ट्स, एनिमेशन

Saturday, February 1, 2020

क्या हम जहरीले बनते जा रहे हैं?

                                                    फोटो स्त्रोत:https://www.superempreendedores.com/
                                                   lifestyle/como-lidar-com-as-frustracoes-profissionais/

आज एक पोस्ट पढ़ा जिसमें यह बताया गया कि एक व्यक्ति किस तरह दूसरे के साथ जहरीला व्यवहार करता है। यहां जहरीला का मतलब बिल्कुल ही अलग है। यानि वह एक स्वार्थी के रूप में आपसे मिलता है काम होते ही आप से दूरी बना लेता है। इससे यह साबित होता है कि वह व्यक्ति जिसने मदद की वह दूसरे के प्रति अपनी भावनाओं को गलत समझ रहा है। और उसे जहरीला करार देता है। यह बात ज्यादातर सोशल मीडिया के फॉलोअर और दोस्ती में ज्यादा महत्व रखती है। इसने व्यक्ति को जोड़ा तो लेकिन एक दूसरे को जहरीला भी बना दिया। आप जब तक लाइक और कमेंट करते हो तब तक व्यक्ति आपका अच्छा फॉलोवर और दोस्त बना रहता है जैसे ही आपने कमेंट और लाइक बंद किया व्यक्ति जहरीला बन जाता है। इसके दोनों पक्षों के अंश नीचे दिए हैं:
स्त्रोत: http://quotesgate.com/toxic-people-never-apologize-for-anything-or-admit-their-mistakes


(जहरीले लोग कभी भी किसी चीज के लिए माफी नहीं मांगते हैं या अपनी गलतियों को स्वीकार करते हैं
हम सभी को जीवन में कुछ विषैले लोगों का सामना करना पड़ा है और हम जानते हैं कि अगर वहाँ एक चीज है जो हम उनसे कभी नहीं लेते हैं तो यह एक ईमानदार माफी है। आप उन्हें इन शब्दों को सुन सकते हैं, लेकिन यह केवल आपका फायदा उठाने के लिए होगा या आपको उन्हें मनचाहा कुछ देने में हेरफेर करेगा। किसी भी अन्य मामले में वे कभी नहीं कहेंगे कि वे क्षमा नहीं करते हैं और न ही स्वीकार करते हैं कि उन्होंने गलती की है। वे हमेशा सही दिखने की कोशिश करेंगे और किसी और पर दोष मढ़ेंगे। क्यों? क्योंकि वे अपनी गलतियों के लिए पर्याप्त परिपक्व नहीं हैं और उन्होंने जो किया है उसकी जिम्मेदारी लेते हैं। ) (इसका हिन्दी रुपांतर गूगल बाबा की सहयोग से किया है।)


क्या व्यक्ति वास्तव में ऐसा होता है। इसके जवाब में एक दूसरी पोस्ट पढ़ने को मिली जिसका कुछ अंश इस प्रकार है:
मानव व्यवहार का बहुत महत्वपूर्ण नियम है। अगर हम उस नियम का पालन करेंगे तो कभी मुश्किल में नहीं फँसेंगे। उस नियम पर चलेंगे तो हमारे पास अनगिनत दोस्त होंगे और हम हमेशा खुश रहेंगे। परंतु जिस पल हम उस नियम को तोड़ेंगे, उसी पल से मुश्किलों में फँस जाएँगे। बुद्ध ने ईसा के पाँच सौ साल पहले पवित्र गंगा नदी के किनारे पर इसका पाठ पढ़ाया था! 1900 साल पहले हिन्दू धार्मिक ग्रंथों ने इस सूत्र की व्याख्या की थी। ईसा मसीह ने इस सूत्र को एक विचार के रूप में संक्षेप में कहा था, जो शायद दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण नियम है, ‘दूसरों के साथ वही व्यवहार करो, जैसा तुम चाहते हो कि वे तुम्हारे साथ करें।’ आप चाहते हैं कि आपसे मिलने-जुलने वाले लोग आपकी तारीफ करें, आप चाहते हैं कि आपकी प्रतिभा को पहचाना जाए, आप चाहते हैं कि आप अपनी छोटी-सी दुनिया में महत्वपूर्ण बनें, आप सस्ती चापलूसी या झूठी तारीफ नहीं सुनना चाहते, परंतु आप सच्ची प्रशंसा अवश्य सुनना चाहते हैं। आप चाहते हैं कि आपके मित्र और सहयोगी आपकी दिल खोलकर तारीफ करें और मुक्तकंठ से सराहना करें! हम सभी यह चाहते हैं। इसलिए हमें इस स्वर्णिम नियम का पालन करना चाहिए और दूसरों को वही देना चाहिए, जो हम उनसे अपने लिए चाहते हैं। कब? कैसे? कहाँ? जवाब है- हर समय, हर कहीं। कई लोगों की जिंदगी शायद बदल जाए अगर कोई उन्हें यह अनुभव करा दे कि वे महत्वपूर्ण हैं। बिना लाग-लपेट के सच बात यह है कि आपसे मिलने वाले ज्यादातर लोग अपने आपको आपसे किसी न किसी मामले में सुपीरियर समझते हैं। स्त्रोत: वेबदुनिया

मेरा तो यह मानना है कि ऊपर के अंश से यह तो पता चल ही जाता है कि प्रत्येक प्राणी अपनी प्रशंसा का भूख है। अगर उसे समुचित प्रशंसा नहीं मिलती है तो वह सामने वाले को जहरीला करार देता है। यानि जब तक आप अपनी प्रशंसा सुन रहे हैं वह आपके िलए महत्वपूर्ण व्यक्ति है। जैसे ही उसने आपकी प्रशंसा बंद की या अपनी कोई कार्य के लिए आपसे अनुरोध किया आपके लिए वह व्यक्ति कटुता पूर्ण हो गया। इसलिए सिर्फ प्रशंसा पाना ही सही नहीं है एक बार आप भी सामने वाले की प्रशंसा करके उसके अनुग्रहित करें ताकि आपकी प्रशंसा वाली बातें कम न हों।

Sunday, June 2, 2019

SPIN: WIN $100 असलियत क्या है आइए जानें
दोस्तों आज मैं आपसे ऐसे एप्प के बारे में जानकारी दूंगा जिसमें यह दावा किया जाता है कि आपको इससे प्रतिदिन $100 की कमाई होगी। लेकिन यह बिल्कुल ही फेक है। मैंने करीब दो महीने इन एप को मोबाइल में डाउनलोड किया और उसे यूज किया। जब शर्तें पूरी हो गई तो सर्वर डाउन का मैसेज आकर यह बंद हो जाता है। आइए जाने पूरी कहानी:

SPIN: WIN $100

दोस्तों इस एप्प के बारे में मुझे यूटयूब पर सर्च के दौरान एक वीडियो मिली। इसमें जानकारी दी गई कि आप इसे अपने मोबाइल में डाउनलोड कर लीजिए और डेली का 100 डॉलर कमाइए। मैंने इसे एक बार आजमाने के ख्याल से इसे डाउनलोड किया। इसके कुछ स्क्रीन शॉट में नीचे डाल रहा हूं देख लीजिए:-

Monday, June 16, 2008

सैंया मोर मिला हल्का भगवन कसम,

सैंया मोर मिला हल्का भगवन कसम,
न चले वो चेनाल्का भगवान् कसम,
सैंया मोर मिला हल्का भगवन कसम,

न चले वो चेनाल्का भगवान् कसम,
मछरी मुर्गा ऊ कबहु न खावे
दूध दही घी त मानहु न भावे ,
छाते चटनी ऊ गलका भगवान कसम
जतन से जन उके जगाई,
ऊ दिखाई दिए गालवा से लड़ाई,
बतिया तल दिए गलका भगवान् कसम,
२बीती जाए रे हमरी जवानिया
सुखा जाए रे देहिया के पनिया
जोवान्वा जाए रे ढलका भगवान् कसम ३लागल्वे
बनी हा त आसरा
बतिया भुजे ला सिर्फ़ दिवासरा
कहियो दहन होई होलिका भगवान् कसम ४सैंया
मोर मिला हल्का भगवन कसम, न चले वो चेनाल्का भगवान् कसम,
अगर इस गाने को पुरा सुनना हो टू इस लिंक पर क्लिक्क करे सुने --
http://bhojpurimp3.blogspot.com/